ऐतिहासिक रूमी दरवाज़े के प्रांगण में एक भव्य देशभक्तिपूर्ण सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन इण्डो तिब्बत सीमा पुलिस (पूर्वी फ्रंटियर) एवं एकाग्रता इंटरनेशनल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया।

ऐतिहासिक रूमी दरवाज़े के प्रांगण में एक भव्य देशभक्तिपूर्ण सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया।
डा० शक्ति कुमार पाण्डेय
ग्लोबल भारत न्यूज
लखनऊ, 10 अगस्त।
कार्यक्रम का आयोजन इण्डो तिब्बत सीमा पुलिस (पूर्वी फ्रंटियर) एवं एकाग्रता इंटरनेशनल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया।
यह कार्यक्रम आईजी आईटीबीपी (पूर्वी फ्रंटियर) श्री के. संजय कुमार के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर श्री आर. एन. सिंह (डीआईजी), श्री सत्येंद्र कुमार (डीआईजी) तथा श्री आर. एस. चंदेल (डीआईजी) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक संध्या का संगीतमय शुभारंभ हेम सिंह द्वारा बांसुरी पर प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ की सुमधुर ध्वनि के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम की प्रमुख सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:
हेम सिंह: बांसुरी पर ‘वंदे मातरम’ एवं ‘एक साथी और भी था’ की मनमोहक संगीतमय प्रस्तुति।
थिंले भूटिया: ‘तेरी मिट्टी में’, ‘सुनो गौर से दुनिया वालों’ और ‘जलवा’ जैसे ऊर्जावान गीतों का शानदार गायन।
जीत राम: ‘ये देश है वीर जवानों का’ गीत के माध्यम से देशभक्ति का जज्बा जगाया।
कर्म: सेक्सोफोन पर देशभक्ति की धुनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
संजय: ‘रंग दे बसंती’ एवं भावुक कर देने वाले गीत ‘जिंदगी मौत न बन जाए’ की प्रभावी प्रस्तुति।
पूजा कुमारी: ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ और ‘देश रंगीला’ गीतों से सभी का दिल जीता।
ITBP ग्रुप: जवानों द्वारा सामूहिक गीत की ऐसी जोशभरी प्रस्तुति दी गई कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमूह और अतिथियों ने कलाकारों एवं आईटीबीपी के जवानों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और उत्साह की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


